पंडित जसराज को सामने बैठकर सुनना.......

पंडित जसराज जी का गायन सामने बैठकर सुनने का अवसर कई बार मिला चाहे वह ताज महोत्सव का कार्यक्रम हो या फिर आईटीसी संगीत सम्मेलन या फिर मथुरा का स्वामी हरिद्वार संगीत समारोह एक बार निधिवन में भी सामने बैठकर उनका कार्यक्रम सुना यह वह जमाना था जब शास्त्रीय गायकों का गाने सुनना दुर्लभ होता था और ऐसे कार्यक्रमों की सूचना पाकर संगीत प्रेमी और कलाकार दौड़े चले आते थे
पंडित जसराज जी का अक्सर आगरा आना होता था यहां की व्यवसाय और संगीत प्रेमी मधुपुर कपूर के साथ उनके पारिवारिक संबंध थे  भी अक्सर सपरिवार उनके यहां आया करते थे एक बार उन्होंने पंडित जसराज जी का कार्यक्रम अपने घर में आयोजित किया । विद्यालय में खबर आई और हमारे गुरुजी पंडित गोपाल  लक्ष्मण गुने जी ने कक्षाएं स्थगित कर दी और सभी विद्यार्थियों से कहा की पंडित जी का गाने सुनने चलना है । उस दिन विद्यालय जल्दी बंद हो गया और हम सब सारे विद्यार्थी गुरुजी और अध्यापक खंदारी स्थित मधु कपूर के घर पर पहुंच गए कार्यक्रम उनके ड्राइंग रूम बेताब तो काफी बड़ा था जब हम वहां पहुंचे तो वहां काफी संख्या में आगरा के कलाकार संगीत प्रेमी और संगीत के विद्यार्थी पहुंच चुके थे पंडित जसराज जी सपरिवार सामने बैठे थे औपचारिक अभिवादन के बाद पंडित जसराज जी के बच्चों के गायन से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद पंडित जसराज जी का गायन आरंभ हुआ तबले पर कोई स्थानीय कलाकारी था मुझे याद नहीं काफी समय हो गया शायद पंडित सुरेश हरिदास जी थे पंडित जसराज जी को पता था उनके सामने बैठे लोग शास्त्रीय संगीत के कलाकार हैं जानकार हैं और विद्यार्थी इसलिए उस दिन वह जमकर गाय मैं उन दिनों विद्यार्थी था इसलिए मैं अपने गुरु जी के साथ बैठा था और पंडित जसराज जी के गायन की बारीकियों को गुरुजी से पूछते हुए गायन का आनंद ले रहा था उस दिन का कार्यक्रम बड़ा अच्छा रहा और सभी लोग पंडित जसराज जी के गायन की प्रशंसा कर रहे थे और अपना सौभाग्य मान रहे थे कि उन्हें पंडित जसराज जी की दुर्लभ दर्शन भी हुए और दुर्लभ गायकी के साथ अद्भुत गायन भी सुना यह कार्यक्रम हमें हमेशा याद रहा हमें यह भी याद रहा की इस कार्यक्रम के बाद हम महीनों उनके गायन की चर्चा करते रहे थे सचमुच हम लोगों के लिए पंडित जसराज जी का गायन अविस्मरणीय था

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