बुलबुल का मुंडन

बुलबुल का मुंडन ...

कछला घाट आगरा से लगभग 155 किलोमीटर दूर है और यहां पर कार द्वारा 3 घंटे में आसानी से पहुंचा जा सकता है । यही पर  बुलबुल का मुंडन करने का निश्चय हुआ। मुंडन गंगा किनारे होना चाहिए ऐसी पूजा कि इच्चा थी ।कछला घाट पर गंगा बहती है।यहां गंगा में स्नान करने के लिए हजारों लोगों की भीड़ हमेशा उपस्थित रहती है।यहां का प्राकृतिक वातावरण और धार्मिक माहौल मन को प्रसन्न करने के लिए पर्याप्त है ।
हम लोग अपनी कार से कछला घाट को करीब नौ बजे चल दिए । यद्धपि हमें छे बजे निकालना था लेकिन जैसा आमतौर पर होता है हम लोग सही समय पर नहीं निकल पाए और हमारा निकलना 9:00 बजे की आसपास हो पाया । हमें टूंडला एत्मादपुर आवागढ़ एटा कासगंज होते हुए सोरों जाना था ।यहां से कछला घाट का रास्ता लगभग आधे घंटे का होता है सोरों को भारत के प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है और यहां पर अस्थि विसर्जन का विशेष महत्व है।  कहा जाता है कि यहां पर भगवान विष्णु ने बारह अवतार के रूप में जन्म लिया था और पृथ्वी का उद्धार किया था ।इससे थो डी दुर पर ही कछला घाट है 
कछला घाट तक हमारी यात्रा अच्छी रही लेकिन कछला घाट मैं प्रवेश करते समय हमें एक संकरे रास्ते पर थोड़ा रुकना पड़ा ।यहां जाम जैसी स्थिति थी और हमें लगने लगा था  यहां हमको देर  हो जाएगी लेकिन हमारे ड्राइवर ने कहा ...बस थोड़ी देर में हम लोग घाट में पहुंच जाएंगे और यह जाम की स्थिति नहीं रहेगी । ऐसा ही हुआ और हमारी कल्पना के विपरीत हम लोग गंगा घाट पर आराम से पहुंच गए ।ड्राइवर ने बताया इस बार गंगा में पानी कम है। हम लोग सीधे  गंगा घाट पर पहुंचे थे इसलिए मुझे अच्छा लगा । वरना मैं सोच रहा था कि काफी दूर तक पैदल  कैसे चल पाऊंगा
यहां गंगा घाट का दृश्य ही निराला था। हजारों लोग की भीड़ गंगा स्नान के लिए आई हुई थी । घाट पर मेले जैसा दृश्य था ।यहां सैकड़ों दुकाने थी । धार्मिक सामग्री बेचने वालों की, खाने पीने का समान बेचने वालों की ,कई तरह की स्टाल, ठेलवालेे और तरह-तरह की सामग्री बेचने वाले लोग यहां दिखाई डे रहे थे । इस समय दोपहर के
12 बज रहै थे  और सूरज आसमान से आग उगल रहा था ।राजा मुंडन के लिए नाई की तलाश में चला गया और मैंने अपना कैमरा निकाला और वहां के दृश्य रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया ।रोशनी इतनी तेज थी कि मुझे स्क्रीन पर कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था फिर भी मैं अंदाज से दृश्यों को कैमरे में कैद कर रहा था ।मुझे यहां  छायादार स्थान की जरूरत थी लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था। राजा नाई को लेकर आ गया था और वही  हमें एक चाय वाले इस के स्थान पर ले गया जहां उसने काफी बड़ा टेंट लगा रखा था ।यहां छाया भी थी और कुछ तख्त  भी पड़े हुए थे ।जमीन पर फर्श भी  था जिस पर बैठने का उसने इशारा किया ।मुझे यहां  एक कुर्सी मिल गई जिस पर बैठकर मैं आराम से सारे दृश्यों को देख सकता था।
मुंडन आरंभ हो चुका था और बुलबुल ने रोना और हल्ला मचाना शुरू कर दिया था। प्रीति और पूजा उसे संभाल रही थी ।नाई अनुभवी था और अपना काम बेहतर तरीके से कर रहा था । राजा ने अपना कैमरा निकाल लिया था और अपने तरीके से फोटोग्रफी कर रहा था ।मेने भी अपना कैमरा निकाल लिया था था और मुंडन के साथ अन्य दृश्यों को भी शूट कर रहा था ।
धूप इतनी तेज थी कि उसकी रोशनी में मुझे स्क्रीन पर कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन मै अंदाज से दृश्यों को शूट कर रहा था ।दृश्य बहुत प्यारे प्यारे थे लेकिन मै ठीक तरह से कुछ नहीं कर पा रहा था । मन ही मन सोच रहा था कि फिर कभी आ ऊंगा और अपने तरीके से शूट करूंगा ।
बुलबुला का मुंडन हो चुका था अब दक्षिणा को लेकर चख चख हो रही थी । न्योछावर के नाम पर प्रीति ने सौ रुपए फटाफट दे दिए थे अब नाई मुंडन के अलग पैसे मांग रहा था। आखिर मामला सुलत गया और नाई प्रसन्न हो चला गया ।
अब गंगा स्नान और कुछ छोटे मोटे संस्कार बाकी थे जो पूरे हुए तो सांस में सांस अाई ।बुलबुल शांत हो चुकी थी और अब नए वेश में खुश लग रही थी ।
राजा अब जल्दी मचाने लगा । उसने समय सीमा बांध दी ।हमारी कुछ और देर ठहरने कि इच्चा थी ।प्रीति घाट का बाजार और नाव में घूमना चाहती थी। मै चाहता था कि कुछ और ठहर कर चाय वाय पी जाए कुछ घूमे और कुछ और  दृश्यों को देखे लेकिन हमने मन को मार लिया और सोचा की फिर आएंगे 
हम अगली यात्रा के लिए तैयार थे ।चलने से पहले राजा ने कहा चलो एक ग्रुप फोटो हो जाए ।वो फोटो खेचने की तैयारी करने लगा और मेने भी मौका देख कुछ और  दृश्य शूट करने की सोची लेकिन बैटरी ने धोखा दे दिया। मुझे लगा शायद किस्मत में यें नहीं है तब मैने अपना कैमरा अंदर रख लिया 
हमारी कार घर वापसी को चल दी थी ।हमें घर से निकले हुए सात घंटे हो चुके थे हम लोगो ने अभी तक बस एक ठंडा सैंडविच खाया था जो प्रीति ने सवेरे बना कर रखा लिए थे ।अब हमें भूख लग रही थी ।
कार सरपट दौड़ रही थी ।कासगंज पार हो चुका था और अब एटा में हमारी कार दौड़ रही थी। राजा ने कहा आवागड़ आने दो वहां एका अच्छा ढाभा है वहीं खाना खाएंगे ।
मेने पूछा कब आएगा ।
उसने कहा पच्चीस मिनट बाद 
कार दौड़ रही थी और में ढाबे के खाने की कल्पना कर रहा था 
आखिर वो ढाबा आ ही गया ।ढाबा अच्छा था । देखा वहां रोडवेज कि सारी बसे रुक रही थी । बस मामला समझ में आ गया की ड्राइवर क्यों इस ढाबे की बात कर रहा था । राजा भी इस ढाबे से परिचित था क्योंकि वो बस से बरेली जाता था तो बस यही रुकती थी 
खाना टेबिल पर आ चुका था और हम अपनी भूख शांत करने में लगे थे । खाना ज्यादा  अच्छा नहीं था  कम से
कम मुझे पसंद नहीं आया फिर भी पेट भरने के लिए ठीक था ।
यहां हम काफी देर रुके। यहां हमने मोबाइल से जी भर फोटोग्राफी भी की ।बुलबुल यहां खुश थी और बार बार अपने सिर के बालों को खोज रही थी ।उसके चेहरे पर अजीब से भाव आते जिसे देख हमें आनंद आ रहा था ।
हमारा सफर फिर प्रारंभ हो गया ।गाड़ी रफ्तार से दौड़ रही और मै आंखे बंद कर सोने का प्रयास कर रहा था लेकिन नींद नहीं आ रही थी फिर भी आंखे मूंदने  से आराम मिला रहा था और वक्त आराम से कत रहा था।
रामबाग आ गया ... प्रीति ने जब कहा तो हम यमुना के पुल से गुजर रहे थे । मेने पूरी आंखे खोल दी अब कितना समय लगेगा घर पहुंचने में ये हमें पता था ।
      यात्रा और मुंडन ठीक प्रकार से शांति पूर्वक हो गए यह देखकर प्रसन्नता हुई लेकिन सफर कि थकान अब महसूस होने लगी थी ।


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