कुत्ते की पूंछ
कुत्ते की पूंछ सीधी नहीं होती .....
सरकारी बाबु केसे होते है यह कहने की जरूरत नहीं ।अधिकांश तो नहीं लेकिन कुछ तो होते है जिन्हे बेईमानी और भ्रष्टाचार पसंद है ।उन्हें इंसानियत से कुछ लेना देना नहीं ।वे भगवान से भी नहीं डरते ।इन्हे तो बस अपनी जेब भरनी होती है और इसके लिए वे कुछ भी करने को तैयार रहते है । इन्हें पिशाच भी कहा जाये तो अतिसियोक्ति नहीं होगी। बस मुर्गा फ़सने की देर है यह उसका खून चूसने को तैयार हो जाते हे ।
सरकार भले ही भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाने की बात कहे इन लोगो पर कोई असर नहीं होता ।.ज्यो ज्यो दवा की मर्ज बढ़ता गया यह लोग भ्रष्टाचार के नए नए रास्ते निकाल ही लेते हे। देश समाज और मानवता से इन्हें कोई लेना देना नही बस अपने निहित स्वार्थ में अंधे होकर ये बेईमान अपनी दुकाने चलाते रहते हे।
यह बात में नहीं कह रहा हूँ लोग कहते हे ।आए दिन समाचार पत्रों में छपती खबरे, रेडिओ टी.वी में चीखते समाचार वाचक सब यही कहते हे कि सरकारी तंत्र अंकुश हींन हो चुके हे और भ्रष्टाचार रिश्वत इनकी आदत बन चुकी हे .
आवास विकास में गरीबो के लिए आबंटित मकान की रजिस्ट्री के लिए बिहारी बाबु ने मुझे खून के आंसू पिला दिए। अपनी चप्पल घिसते मैने कितने ही दिन बिता दिए लेकिन बिहारी बाबु की औपचारिकता पूरी नहीं कर पाया ।उनकी सात पीदियो को गाली देने के बाद भी मेरा कोई भला नहीं हुआ तो मेने अपने परिचित
गोतम बाबू और पांडे जी से भी बात की । वे दोनों भी आवास विकास में बाबू थे और मेरे पडोसी भी । थोडा आगे चल कर गली के कोने में रहते थे मगर उन्होंने हाथ जोड़कर क्षमा मांग ली – पडित जी हमारे यहाँ भाई भतीजावाद और मित्रता नहीं चलती. पक्षपात जेसा कोई शब्द हमारी डिक्शनरी में नहीं हे यहाँ तो सबका हिस्सा बन्धा हुआ हे .पाई .पाई का हिसाब यहाँ रक्खा जाता हे कोई अपना हिस्सा नहीं छोड़ता.भाई साहब हमें माफ़ करे .
मरता काया ना करता जब उनकी परंपरा का पालन किया तो मेरा काम चट पट संपन्न हो गया ।मुझे ना तो चक्कर कटाने पड़े और ना ही मेरे चप्पल की एडिया घिसी ।.घर बेठे चपरासी कागज़ देने आ पहुँचा ।मुझे देखते ही प्रसन्नता का भाव आते बोला –पंडित जी बधाई आपका काम हो गया ।
मेने उसे साधुवाद और धन्यवाद देना चाहा तो बोला –महाराज हमारे यहाँ धन्यवाद और साधुवाद नहीं चलता .हमें तो बस मिठाई खानी हे .
मेने कहा –अन्दर आओ तुम्हे मिठाई भी खिलाऊंगा और बढ़िया चाय भी ।
.वह बोला –अरे महाराज क्या कहते हो हम किसी की दी हुई मिठाई नहीं खाते ।आप तो बस पांच सौ रुपये दे दो हम खुद मिठाई खा लेंगे
उसकी बात सुनकर क्रोध जरुर आया मगर में कुछ बोला नहीं । मगर मन ही मन हजारो गालिया जरुर दे डाली। मै जानता था की यह कुत्ता मानेगा नहीं।कोशिश करूंगा तो काट खायेगा ।
अंततः उसकी इच्छा पूरी कर मेने अपने कागज़ ले लिए लेकिन भगवान से यह प्रार्थना जरुर की मुझे भी एक मौका जरुर देना ताकि में भी इनको सबक सिखा सकूँ ।
समय का चक्र चलता रहा मै तो इस बात को भूल ही गया था तभी एक दिन मेने बिहारी बाबु को अपने ब्लड बेंक में परेशान हाल घुमते देखा ।उसे देखते ही मुझे सब कुछ याद आ गया ।मेरे मन में जिज्ञ्न्सा हुई कि बिहारी बाबु यहाँ केसे । कुछ ही पल में सब कुछ स्पस्ट हो गया और मुझे सब पता चल गया ।
बिहारी बाबु के इकलोते बेटे को ब्लड की जरुरत थी और वो ब्लड भी आसानी से उपलब्ध नहीं था । बिहारी बाबु हर तरफ से प्रयास कर चुके थे लेकिन ब्लड नहीं मिला । तब किसी ने उन्हें बताया की इस ब्लड बेंक में मिला सकता हे सो वे यहाँ परेशां हालत में घूम रहे थे। सारी बात जान कर मेरे चेहरे पर कुटिल मुस्कान आ गई और मैने अपनें मन में उसे सबक सिखाने का निश्चय कर लिया । यद्यपि यह मेरे स्वभाव के विरुध्ध था ।मुझे सेवा भाव में आन्नद आता था ।किसी की सहायता कर मेरा ह्रदय प्रसन्न हो जाता था ।मेरे पास शब्द नहीं हे की मानवता प्रेमऔर सेवा भाव में कितना आनंद हे शायद इतना की उसे पेसे से खरीदा नहीं जा सकता .
थोड़ी देर बाद बिहारी बाबु मेरे सामने थे । शायद वो मुझे पहचान नहीं पाया ।उसकी हालत ख़राब थी .वो मेरे सामने गिदगिदाने लगा –साहब मुझे ब्लड दिला दो... मेरे बच्चे की हालत बहुत ख़राब हे ।
एसे मौको पर अक्सर मेरा मन पिघल जाता था और में हर संभव यही कोशिश करता था की किसी का भला हो जाए ।मगर उस दिन तो मेरे मन में शेतान ने कब्जा कर लिया था और मन का आक्रोश फट पड़ा था की इसे आज सबक जरुर सिखाना हे
मेने कहा –यह ब्लड नहीं हे
मेरी बात सुनकर बिहारी फटी आँखों से मुझे देखने लगा बोला –मुझे बताया गया की यहाँ मिल जाएगा ।
मेने उसे घुर कर देखा और कहा –कह दिया न की नहीं हे .फालतू समय नष्ट मत करो।
बिहारी बाबु गहरी निराश में डूब गया .।उसने मुझे ध्यान से देखा ।शायद उसे मेरा चेहरा पहचाना सा लगा ।वो याद करने लगा ।अचानक उसे सब याद आ गया
वह बोला –सर आप .....आपाने मुझे पहचाना नहीं ...मै बिहारी बाबु हूँ... मेने आपके मकान की रजिस्ट्री करवाई थी ।
.मेने कहा –तो .
वह गिडगिडाने लगा -सर आप चाहे तो इंतजाम कर सकते हे .मेरा इकलोता बच्चा हे में बर्बाद हो जाऊंगा . ...सर....
.मेने अपने मन में आ रही भावनाओ पर काबू किया और वहा से उठा कर चला आया। .बिहारी बाबु थोड़ी देर इंतजार करते रही फिर मेरे सहायक से पूछा तो उसने उपेक्षा से जवाब दिया... साहब लंच कर रहे हे समय लगेगा ।
बिहारी बाबु के लिए एक एक पल कटना ही मुश्किल था और में सौच रहा था की बिहारी बाबु को कुछ न कुछ एहसास तो हुआ होगा
.मेरा लंच करने का मन नहीं था तभी मेरे पडोसी गौतम जी और पान्डे जी भी आ गए .वे मेरे परिचित थे और मुझे अच्छी तरह जानते थे ।उन्होंने मुझसे आघ्रह किया – पंडित जी इनकी मदद कर दो ...बिचारा बहुत परेशान है ..जाने कहां कहां घूम आया है
मैने उनकी और देखा और उन्ही की बात दोह्ररा दी –भय्या यहाँ भाई भातेजवाद और मित्रत्र्ता नहीं चलती .पक्षपात तो हमारी डिक्शनरी में कही नहीं हे .कृपया हमें माफ़ करे ।
वे समझ गए
बिहारी रोने लगा .सर मानवता के नाते हमारी मदद कीजेये ....प्लीज मेरा इकलोता बेटा हे
बिहारी के मुह से मानवता की बात सुन जेसे में फट पड़ा मन का सारा गुबार जेसे लावा बन फट पड़ा –अरे तुम मानवता की बात करते हो ....कितनी मानवता दिखाई हे तुमने... अपने दफ्तर में क्या बिना दक्षिणा तुमने किसी का काम किया हे.. .तुम्हारे यहाँ तो सबके हिस्से बंधे हे ....कोई अपना हिस्सा नहीं छोड़ता हे... जनता की मजबूरियों से आपको क्या लेना देना.. कोई मरता हे तो मरे आपकी बाला से ...आपको तो बस अ पनी मुट्टी गरम चाहिए ....पता नहीं में ना जाने क्या क्या बक गया और शायद बकता रहता यदि एक महिला सामने नहीं आती .
परेशां आँखों में आंसू लिए उस औरत ने बिहारी बाबु से पूछा –अरे खून का क्या हुआ। डॉक्टर ने कहा हे यदि खून नहीं मिला तो बेटा मर जाएगा .
बिहारी बाबु रोने लगा ।. पाण्डेय और गोतम बाबु ने मेरी और संकेत किया वह औरत मेरी और बड़ी ।उसकी आँखों में आंसू देख मेरा मन पिघलने लगा । गोतम पांडे कहने लगे...पंडित जी हम समझ गए हमसे पाप हुआ हे .हमें अच्छी तरह समझ आ गया कि पेसे से हर चीज नहीं खरीदी जा सकती हे कुछ पुन्य भी कमाना होता हे .आपने अच्छा सबक दिया हे .
वे भगवान और बच्चो की कसम खाते रहे मै चुप ही रहा यद्यपि में खून की व्यवस्था करने के लिए आतुर था बिहारी बाबु बोला –सर आप बदला ले रहे हे .अच्छा किया भगवान ने अच्छा सबक दिया हे.... समझ गया कि कभी न कभी मुर्गी टेली पर आती जरुर हे... आप हमें क्षमा कर दे .
उनकी बाते सुन औरत बिफर गयी ।बिहारी बाबु को कोसती हुई बोली –लो खरीद लो अपने रश्वत के पेसे से बच्चे की जिंदगी....बच्चा चला जाएगा और तुम पेसो को अपनी छाती से लगाए रखना।
.बिहारी बाबु सर झुकाए सब सुनाता रहा . आंखों से आंसू गिरते रहे .।
औरत ने मेरे और देखा और कहा –मेरा इकलोता बेटा हे प्लीज़ ...
उससे आगे वह कुछ कहती मेने कहा –रोइए नहीं खून का इंतजाम हो रहा हे .
उसने बड़ी आशा से मेरी तरफ देखा
बात ख़तम हो गई खून का इंतजाम भी हो गया। बेटा भी ठीक हो गया । .बिहारी बाबु भी कभी रिश्वत ना लेने की कसम खा गए .पांडेजी और गोतम जी भी साधुवाद दे गए और बात बहुत पुरानी हो गयी
कालान्ताएर में मेरे एक मित्र मेरे पास आये बोले –पंडित जी मुझे मकान की रजिस्ट्री कर वानी हे। एक बाबु खूब परेशां कर रहा हे ससझ लो खून के आंसू पिला दिए
मेने पूछा कोन हे बाबु .
वे बोले उसका नाम बिहारी बाबु हे... बड़ा ही कमीना हे। यह सुन मेरा मन कड़वाहट से भर गया ।कितना कमीना इनसान हे ।भगवान और बेटे की भी झूठी कसम खा गया और फिर वही काम । मुझे आश्चर्य भी हुआ कि वे।भगवान से भी नहीं डरते । लगता है उनकी आत्मा ही मर गई है ...साले कुत्ते है कुत्ते
मेने मित्र से कहा –आप पांडे जी और गोतम जी से मिले....आपने तो उनके बच्चो को पढ़ाया भी हे।
.वे बोले हाँ मिला था मगर ....
इससे पहले वे कुछ कहते मेने कहा ...उन्होंने यही कहा होगा - हमारे यहाँ भाई भातेजवाद नहीं चलता हे ...पक्षपात तो हमारी डिक्शनरी में नहीं हे ...यहाँ तो सबका हिस्सा बंधा हुआ हे....पाई पाई का हिसाब रक्खा जाता हे.
मित्रवर मेरी शकल देखने लगे बोले –यही कहा था .
मेने हाथ जोड़कर कहा –मास्टर साहब मेरी कोई जान पहचान नहीं हे .मुझे क्षमा करे .
मित्रवर तो चले गए मगर में बेठा बेठा उन लोगो को जी भर कर गालियाँ देता रहा .साले कमीने हरामी ....किसी ने सच कहा है... कुत्ते की पूंछ कभी सीधी नहीं होती
- विजय राघव आचार्या

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